बुधवार, 4 जनवरी 2012

मैकशी के लिए या मौत के लिए शराब ..????

कहते हैं इन्सान वो होता है जो अपनी गलतिओं से सिख ले । पर सीखना तो दूर कोई चेतता भी नही । पिछले दिनों बंगाल में देशी शराब पिने से कई लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी । सिटी ऑफ़ जॉय कहा जाने वाला शहर सिटी ऑफ़ सॉरो बन गया । सरकार ने दिखावे के नाम पर कुछ लोगों का पकड़ धर किया था पर अब सब कुछ शांत हो गया।
अभी एक पक्वाडा ही बिता था की दूसरी घटना आन्ध्र प्रदेश में घटी । दिन भर कम के बाद थोडा शराब पिने से उससे नशा नही मौत मिलेगी इश्क पता उसे भी नही था । पैसे की थोड़ी लालच ने कई लोगों को मौत दे दी । तिन महिलाओं के साथ सोलह लोगों की मौत हो गयी । इनकी मौत दो दिन बाद अस्पताल में ही हुई जहाँ डॉक्टर ने बताया की देशी शराब में मिथाइल अल्कोहल मिलाने से ऐसा हुआ । पर सोचने की जरूरत है की ऐसा क्यूँ हो रहा है ? सरकार चुप चाप मुख्दर्शक क्यूँ बनी है ? सवाल उठता है की क्या सरकार की संवेदना मर चुकी है ? सरकार इसे रोकने को कोई कदम क्यूँ नै उठाती ?
अगर सरकार कुछ करती तो आलम ये नहीं होता । हाँ ऐसा जरुर होता है की दिखावे के लिए कुछ लोगों को पकड़ जरुर लिया जाता है पर उनकी राजनीति पहुच और उनके र्शुख इतने होते हैं की कोई उनका बल भी बका नै कर सकता । यही वजह है की उनपर कोई सिकंजा नही कसा जाता । तो सवाल यह है की कब तक चाँद लोगों के मुनाफे के लिए गरीबों की जान ली जाएगी॥ यूँ आबकारी कानून किसी भी तरह की मालावत वाली शराब का कम करने वालों के खिलाफ भरी जर्मन के साथ साथ सख्त सजा का प्रावधान है । लेकिन देशी शराब का धंदा करनेवाले इन कानूनों को धता बता कर धडल्ले से अपना कारोबार चला रहे हैं ।

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