मंगलवार, 30 नवंबर 2010

कांग्रेस की नगरी को चहुपट करता राजा


आ देखते देखते कांग्रेस राजनीति में अछूत हो गयी है । लोग उससे कन्नी काटते देख रहे हैं । आज हर कोई कांग्रेस को भारस्ताचार को पोसक मानता है चाहे वह राजा का मामला हो या कोड़ा का । ऐसा मन जा रहा है की दोनों ने कांग्रेस के इशारे पर जनता के पैसों को बपौती धन समझा । ये नाकारा नही जा सकता की कांग्रेस का इतिहास घोटालों से जुड़ा रहा है। पर दर है खिन इस बार राजा का यह घोटाला कांग्रेस को रंक न बना दे । नाम के विपरीत कम करने वाले इस संचार मंत्री ने कांग्रेस को कही नक् रखने लायक नै छोड़ा ।
अभी इन सब से वो उबार भी नै पाई थी की जगमोहन रेड्डी ने अपना इस्तीफा सौंप कर कांग्रेस की अंदर में जमीन हिला दी । पार्टी का कहना है की इससे कोई व्यापक असर नै पड़ेगा । बहरहाल कांग्रेस को यह बात भूलनी नै चाहिए की जगमोहन के पिता के असमय मौत पर जनता की जो शानुबुती थी उससे जगमोहन ने राजनीति की पूंजी के रूप में संचित किया है । या यूँ कहें की उन्होंने जनता की नब्ज बिना छुए पहचान ली
जगमोहन के बागी तेवर से ये साफ़ जाहिर है की वो जनता के बेहद करीब हैं अगर उन्हें मुक्यमंत्री नहीं बनाया गया तो वो कांग्रेस का जीना मोहल कर देंगें । यह सपना उन्होंने तब से बुन रखा है जब उनके पिता की असमय मिरितु हुई थी । तब जनता और खुद जगमोहन को ऐसा लगा था की अगला मुक्यमंत्री वो खुद होंगे पर ऐसा सायद इस लिए भी नै हुआ की यह गाँधी नेहरु का विसेसधिकार है । हो सकता है वो इस बार न बन पायें लेकिन आने वाले समय में वो कांग्रेस का समीकरण जरुर बिगड़ देंगें । वो अपने चैनल पर खुल कर राहुल गाँधी की आलोचना करते हैं । जगमोहन ही ऐसे युवा नेता हैं जो राहुल को चलेंजे कर सकते हैं जिसके पास व्यापक जनाधार है । उनको यह सुविधा अपने पिता से विरासत में मिली है । इसको कांग्रेस भी भली भीती जानती है सो फिलहाल छुपी साधे है

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