बुधवार, 1 दिसंबर 2010
शिक्षा की पृष्ठ भूमि रहा है बिहार
बिहार हमेसा से करिश्मा का उत्क्रिस्ट उदाहरण रहा है । इस बार के चुनाव ने लोगों के के यादों को कुरेद कर हरा कर दिया है । पुरे देश को यह बता भी दिया है की जब जब देश की राजनीति और राजनीतिज्ञ अपने पथ से विमूढ़ होंगे तब तब बिहार एक आदर्श के रूप में लोगों के समक्ष आएगा । इस कड़ी में जे पी आन्दोलन और गाँधी का स्वतंत्रता आन्दोलन सरीखे देखा जा सकता है ।१९७७ में जो चिंगारी जे पी ने बिहार से फूंकी थी वो आग सरीखे डेलही पहुची और उस समय तात्कालिक प्रधानमंत्री को राजगद्दी छोडनी पड़ी । तब आम खास सब की जबान पर जे पी थे , जिन्होंने सत्ता के गलियारों से होकर भाते तानाशाही बयार के रुख को बदल कर नयी दिसा दी थी । एक तब का दिन था और एक आज का दिन है जब कांग्रेस तिलमिला उठी है , जैसे उसकी छाती पर किसी ने अजगर रख दिया हो बहरहाल जिस तरह से नितीश ने कांग्रेस का जनाधार निगल लिया है वो अजगर नही कोई नितीश जैसा आनाकोंडा ही कर सकता । आज आलम यह है की बिहार में विपक्ष की भूमिका के लिए कोई नै बचा । किसी ने अंदाज भी नै लगाया था की इस तरह का जनाधार होगा । आज बिहार की जनता ने ये इस्सर कर दिया है की वह मसखरी नही चाहता वह किसी युवा नेता का दुवा और भाषण नहीं चाहता वह चाहता है की नए बिहार का आगाज हो । वह चाहता है की जिस शिद्दत के साथ नितीश एस इबारत को लिखना शुरू किया है उसी शिद्हत से इसे अंजाम भी दें । नितीश ने इस ऐतिहासिक जित के बाद कहा था की आज हम सभी को जाति छोड़ हमे बिहारी होने का परिचय देना होगा तब सायद हम पुरे देश की सियाशत को नई दिसा दे सकते हैं ।
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