दुशासन हर युग में जन्म लेते हैं परन्तु हर दुसासन अपना कम हर युग में अलग तरह से करता है । महाभारत में एक दुसासन था जो सीता माता को भरी सभा में चिर हरण की कोशिस की और आज तो न जाने कितने ही दुसासन हैं जो लोक तंत्र का चिर हरण करना चाहते हैं ।
अभी झारखण्ड में पंचायत चुनाव संपन हुआ हैं । आज कल में परिणाम भी आ जाये परन्तु जी तरह से आज के दशासन लोक तंत्र से खेल रहें हैं वो आने वाले खतरे की ओर इशारा कर रहा है । पंचायत चुनाव के दौरान छतरपुर प्रखंड के अंतर गत चल रहे पंचायत चुनाव के परचार के दौरान एक प्रत्याशी लोगों को अपने छेत्र में हर एक वोटर को पाच सो रुपया ओर एक मुर्गा ओर एक बोतल अंग्रेजी शराब भी दे रहा था , हास्यास्पद तो यह हुआ की वो लोगों को गाँव की देवी के प्रांगन में सपथ दिलाई थी ,वोट मुझे ही देना ।
आज जिस तरह से चुनाव आयोग के खिची मर्यादित रेखा को पर कर पैसों के बल पर वोट लेने की कोशिस की जा रही है वो चुनाव आयोग ओर उसके मापदंडों को मुह चिढ़ा रहा है । सुनने देखने में लगता है की क्या को आज के जमाने में भी लोक तंत्र को अपनी जागीर समझता है ? क्या कोई दुशासन बुधिजीविओं के समाज में लोक तंत्र को नंगा नचाने की कोशिस कर सकता है । इस चुनाव के बाद कहीं ख़ुशी है तो कहीं गम है । खिसी कुछ उन लोगों की जो सचे मायनो में लोकतंत्र चाहते हैं जो गाँधी नेहरु का सपना , जो गाँव में बस्ता है ,उसे जीते हैं । नाराज यहाँ के नौकर शाही हैं । जिनके हाँथ से अब सारी शक्ति हस्तांतरित हो जाएगी , जिन नौकरशाहों की कभी चकलास थी अब मायूसी छाए है ।
इन सब के बिच कल परिणाम आने वाला है कई दिग्गजों की किस्मत इ वी म में बंद है । अब परिणाम जो भी हो लोग अपना दिल थामे बीते हैं ।
अगर लोकतंत्र के हत्यारे जीतते हैं तो लोक तंत्र मृतप्राय हो जाएगी ,ओर अगर सच में मह्त्वाकांची लोग जीतते हैं तो ये लोक तंत्र की बड़ी जित होगी साथ ही साथ लोक तंत्र के सरीर में एक न्य रक्त का संचरण होगा ।
अब परिणाम ही बतायेगा की लोकतंत्र किस रूप में परिणत होगा ................
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