सत्ता में चाटुकारों की तूती हमेसा बोलती है । पार्टियाँ कोई भी हो चाटुकार अपने रशुक से काम ही लेते हैं । कभी कभी महिमा मंडित कर उसके पथ भ्रस्त होने तक की मिस्साल गढ़ते हैं । इतिहास के पन्ने पलटने पर वह जगमगा उठें गे
भाजपा भी चाटुकारों से पटी पड़ी है ऐसा तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष भी मानते हैं । उन्होंने अध्यक्ष की कुर्सी सँभालने समय संबोधन में कहा था कि पार्टी को चाटुकारों से दुरी और जमीनी नेताओं से सरोकार बढ़ाना होगा ,तभी काया पलट हो सकती है । ये बातें सायद जमीनी नहीं हो सकी । वर्षों से कयास लगाया जा रहा था कि उमा भारती देर सबेर भाजपा में लौटेंगी पर इन सरे कयासों को उन्होंने सिरे से ख़ारिज कर दिया । पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अभी कीसी राजनीती पार्टी को सहयोग देने का सवाल ही नही उठता । ससरी पार्टियाँ भारस्ताचार में आकंठ डूबी है। यह बयाँ जिस कीसी परिस्थिति में आये हों पर अभी वापसी पर ब्रेक लगा है । अगर लोगों कि मने तोसब्की किस्मत जसवंत सिंह जैसी नही होती , उनकी एक अलग लोबी है ,जो उनकी वापसी को लेकर संघ तक के मुह पर तमाचा जड़ने में पीछे नै रहा । उमा भले ही आम लोगों कि प्रिय नेता हो उनके दिलों पर राज करती हों पर वो भाजपा में अपने लिए लाबी तयार करने और अपने संघ समर्तकों में जन फुकने में फिसड्डी साबित हुई हैं ।
गौरतलब है कि कांग्रेस पर हमेसा से समय कि राजनीती करने का कलंक लगता रहा है । परन्तु आज भाजपा के कद्दावर नेता भी इस दायरों में आने लगे हैं ,वरना क्या कारन है कि परमोद महाजन ,कप्तान सिंह सोलंकी, शिवराज सिंह चोहान कि बिसात पर उमा को बहार का रास्ता दिखा दिया गया । इस तरह के इल्जाम नरेन्द्र मोदी पर भी लगते रहे हैं कि वो लोगों को सियासत में कंडोम सा इस्तेमाल करते हैं ,और उसे सही समय पर सही ठिकाने भी लगा देते हैं । बहरहाल भाजपा एक विचार वादी संगटन है । सो बेहतर होगा कि एक विचार हो बेहतरी के लिए । ताकि आने वाला समय प्रत्य्कुल साबित हो भाजपा के लिए और भाजपाइयों के लिए .......... ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें