" केसरिया बल भरने वाला
स्वेत रंग सच्चाई
हरा रंग है हरी हमारी
धरती की अंगड़ाई
और कहता है चक्र हमारा
कदम कभी न रुकेगा
हिंद देश का प्यारा झंडा
ऊँचा सदा रहेगा "
ये कविता हमारे पथ्य क्रम में हुआ करता था और हम इसे कंठस्त भी करते थे । यही कारन है की आज ये पंक्तियाँ हमारे रगों में लहू की तरह बहते haइन यही कारन भी रहा की आजाद भगत सरीखे देश भक्त यहीं जन्में ।
फिलवक्त की राजनीती के सामने ये पंक्तियाँ बौनी हो गये हैं । समकालीन दौर में देश की राजनीती ने तिरंगे का इस्तेमाल अपनी अपनी तरह से अपने सियासत की खोई जमीन को तलासने के रूप में किया है । सता पर काबिज लोगों ने अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए भी इश्क इस्तेमाल किया है । आज सियासत में भावनाओं का समवेस लेस मात्र भी नै रह गया है । अभी की बात करें तो कश्मीर मुद्दा इन सब के केंद्र में है । इस साल भाजपा ने स्वतंत्रता दिवस पर कश्मीर के लाल चोक पर झंडा फरने का ऐलान क्या किया की सब ने इया मुद्दे को अपने अपने रूप से राजनितिक रंग देने की कवायद सभी ने शुरू कर दी । कश्मीर से दिल्ही तक सभी इस्सकी दबी जुबान में भर्त्सना करने लगे ।
कांग्रेस के बोधिक लोगों ने इसके खिलाफ बेबाकी से बोला वो भी बोले जिनके मुह पर अमूमन समझा जाता है की कांग्रेसी जाब लगा है ।
बहरहाल यहाँ ये जानना दिलचस्प होगा की पिछले दिनों भारत की तथा कथित लेखिका अरुंधती राय ने भड़काऊ बयाँ दिया था तब कई दिनों तक कांग्रेस सिंह पुच नै दुलाई थी । मसलन विपक्ष ने हंगामा किया तब जाकर देश द्रोह का मामला दर्ज हुआ वो भी तिस हजारी कोर्ट के द्वारा ।
इस पर बात करते हुवे कांग्रेस के बुद्धिजीवी नेता ने ये कहा की अरुंधती पर कोई करवाई न होना भी एक करवाई है ।
अगर दोनु मुद्दों को देखा जाये तो दोनों कश्मीर से जुड़े हैं पर है एकदम भिन्न एक ने देश तोड़ने की कोशिश की वहीँ दूसरा जोड़ने की कोशिस कर रहा है । तब कांग्रेस अरुन्धतीं का समर्थन न सही विरोध भी नकिया । वहीँ भाजपा का खुल कर विरोध कर रही है । नेता ये सार्वजनिक तोर पर कह रहे हैं की अगर घटी में फिर हिंसा भड़की तो इसक जिम भाजपा पर होगा । कांग्रेस की क्या मंशिकता है वो इसी से समझी जा सकती है । भाजपा तो तिरंगा फहराकर ये अलख जगाना चाहती है ये बताना चाहती है की कश्मीर भारत का अभिन अंग है । इससे किसी भी हालत में नै छोड़ा जा सकता । भाजपा के इस कदम को सारी पार्टियाँ सराहती तो अच्छा होता ,जो कांग्रेस इसके खिलाफ है वो सायद भूल गई हैं की इस की पूरी पथ कथा नेहरु के नेतृत्व में लिखी गये थी ......................
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