
एन. आर. आई. सम्मेलन में भारत सरकार ने प्रवासी भारतियों लिए विशेष सुविधाओं का प्रावधान किया है। अपना देश अपनी माटी तथा अपनी संस्कृति के प्रति लगाव होना स्वाभाविक है। इस देश से बाहर जाकर भारत भारतीयता की सुगंध बिखरने वाले महर्षि अरंविद और स्वामी विवेकानंद ने तो कण-कण को अपना आराध्य माना था। निर्माता समीर कर्णिक ने हास्य के माध्यम से ‘यमला पगला दीवाना’ में इन्हीं विषयों को छूने का प’यास किया है।
कहानी में एक मोड़ तब आता है जब गजोधर सिंह का पंजाब से वाराणसी में लेखन करने आयी साहिबा से प्रेम हो जाता है। जिसके पांचो भाई इस शादी के खिलाफ हैं। वो तो अपनी बहन की शादी एन. आर. आई. से ही करना चाहते हैं। फिर धीरे-धीरे पूरा परिवार मिल जाता है। संपूर्ण कहानी में हास्य का अथाह सागर दिखाई पड़ता है।
एक जमाना था जब धर्मेंद’, शत्रुघ्न सिंहा और अमिताभ बच्चन की तुती बोलती थी। फिर 80 से 90 के दशक में सन्नी देओल, बॉबी देओल ने भी दर्शकों को पर्दे पर लुभाया। लेकिन अमिताभ बच्चन का जलवा आज भी कायम है। वो तो ”यंग्री ओल्ड मैन” हैं। एक्टिंग के मामले में सन्नी देओल को तुलनात्मक दृष्टि से ठीक कहा जा सकता है।
फिल्म का तकनीकी पक्ष एवं गीत-संगीत पक्ष को औसत दर्जे का कहा जा सकता है। यह फिल्म दर्शकों को हंसी-मजाक के साथ-साथ तथा एन. आर. आई. के संबंध में ठीक प्रकार से दिखाने में कामयाब हुई है।
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