मंगलवार, 18 जनवरी 2011

गरीबों को है आशियाने की आस!
झारखंड में बेसिक सर्विसेज फार अर्बन पीपुल और इंटीग्रेटेड स्मॉल हाउसिंग डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईएचएसडीपी) का हाल बेहाल है। दोनों ही योजनाओं के तहत शहरी क्षेत्रों में निवास करने वाले बीपीएल परिवारों को आवास मुहैया कराया जाना है, परंतु कहीं पुनर्वास की भूमि उपलब्ध नहीं रहने तो कहीं अधिकारियों की उदासीनता की वजह से यह योजना दम तोड़ती नजर आती है। दक्षिणी छोटा नागपुर मंडल के रांची जिले की बात करें तो बीएसयूपी के फेज एक से छह तक के लिए निकाली गई निविदा में महज तीन एजेंसियों ने ही दिलचस्पी दिखाई। रांची नगर निगम के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी की सुने तो पुनर्वास की भूमि उपलब्ध नहीं रहने से तंग बस्तियों में रहने वाले लाभुक वर्तमान भूमि खाली करना नहीं चाहते, जिससे निर्माण कार्य बाधित हैं। इसी तरह उत्तरी छोटानागपुर मंडल की बात करें तो आईएचएसडीपी योजना के तहत फुसरो नगर परिषद में 886 के विरुद्ध 127 लाभुकों का ही चयन अब तक हो सका है। गिरीडीह में 1132 के सापेक्ष 644, हजारीबाग में 1230 के मुकाबले 1096 लाभुकों का ही चयन हो सका है। कोल्हान मंडल के चाईबासा में 736 के सापेक्ष 665 लाभुकों का सर्वेक्षण तो हुआ, परंतु 159 लोगों के बीच ही राशि का भुगतान किया गया। पलामू मंडल के मेदिनीनगर पंचायत में पुनरीक्षित प्राक्कलन का पेंच फंसा है.

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