रविवार, 16 जनवरी 2011

सिटी घोटाला: अब होगी चौ-तरफा जांच......
सिटी बैंक की गुड़गांव शाखा में 400 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले में रिजर्व बैंक इस बात की जांच कर रहा है कि क्या इस संबंध में ग्राहकों की जांच और खातों पर नजर रखने के नियमों की अनदेखी हुई है।
सूत्रों के अनुसार शीर्ष बैंक की शुरूआती जांच में यह संकेत मिला है कि सिटी बैंक में लगभग एक दर्जन खातों के जरिए करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ। इन खातों को मुख्य आरोपी शिवराज पुरी द्वारा परिचालित किए जाने की आशंका है।
इनमें से कुछ खाते सिटी बैंक के उप ग्राहकों के थे जो धोखाधड़ी के शिकार हुए। जबकि कुछ खाते पुरी ने अपने संबंधित या काल्पनिक लोगों के नाम पर खोले थे।
रिजर्व बैंक इस बात का पता लगा रहा है कि क्या सिटी बैंक ने अपने ग्राहकों को जानें [केवाईसी] नियमों के पालन के बाद इन खातों को खोलने की अनुमति दी। इसके तहत ग्राहकों की जांच अनिर्वाय है। इसके लिए वैध पहचान पत्र और पैन कार्ड पासपोर्ट जैसे जरूरी कागजात के साथ घर के पते का प्रमाणपत्र शामिल हैं।
नियमों के तहत बैंकों के लिए यह भी अनिवार्य है कि वे ग्राहकों की भौतिक रूप से जांच करें।
सूत्रों के मुताबिक इसके अलावा, केंद्रीय बैंक इस बात का पता लगाने की भी कोशिश कर रहा है कि क्या सिटी बैंक ने संदिग्ध सौदा रिपोर्टिंग [एसटीआर] की जांच की थी। इसके तहत बैंक को अपने किसी भी खाते च्ें उच्च और असामान्य सौदों के बारे में नियामक और प्रवर्तन एजेंसियों को जानकारी देनी होती है।
धनाढ्य व्यक्तियों के खातों के मामले में बैंकों को केवाईसी और एसटीआर नियमों का कड़ाई से पालन अनिवार्य है। सिटी बैंक मामला धनाढ्य व्यक्तियों से ही जुड़ा है जो कथित तौर पर पुरी द्वारा धोखाधड़ी के शिकार हुए।
सिटी बैंक ने कहा है कि उसे केवाईसी समेत सभी नियमों का कड़ाई से पालन किया है। साथ ही पुरी की तरफ से संदिग्ध अनियमितता के बारे में तत्काल रिजर्व बैंक और अन्य एजेंसियों को सूचना दी।
सूत्रों का कहना है कि सिटी बैंक ने कुछ ग्राहकों से पुरी के बारे में मिली शिकायत के बाद रिजर्व बैंक को सूचना दी। शीर्ष बैंक 2009 से सिटी बैंक की गुड़गांव शाखा में खातों के जरिए हुए विभिन्न लेनदेन की जांच कर यह पता लगा रहा है क्या किसी में एसटीआर की जरूरत थी।
रिजर्व बैंक 2001 में केवाईसी नियम लागू किए थे। सबसे पहले इस नियम का पालन नहीं करने को लेकर 2004 में कथित तौर पर सिटी बैंक पर ही 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया था।

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