मंगलवार, 18 जनवरी 2011

नेता बनाम चरित्र

ऐसा हम सब जानते हैं की राजनेता और राजनेति यहाँ हमेशा ही केंद्र में रही है । ऐसा कहा भी जाता है की "आम जन को और मिडिया को प्रभावित करने की खबर राजनीती के गर्व से ही आती हैं " । कुछ दिनों पहले बिहार में हुआ विधायक हत्या कांड ने वहां राजनीती के गलियारों में सरगर्मी बढ़ा दी है । साथ ही साथ जन्प्रतिनिधिओन के चरित्र को लेकर बहस भी साथ पर आगये है
ऐसा नहीं की यह पहली बार हुआ है यह हमारे देश की राजनेत में होता रहा है । बिहार , उतर प्रदेश , झारखण्ड aadi प्रदेशों में पपू यादव ,अनूप संदा सरीखे विधायक मौजूद हैं ,जो नहीं राजनितिक लक्ष्मण रेखा की परवाह करते हैं और नहीं सामाजिक मर्यादा की फ़िक्र । ये हमेशा अपने ओहदे और रशुख का गलत इस्तेमाल करते हैं ।
अगर समकालीन राजनीती को देखें तो पता चलता है की राजनीती और अपराध एक दुसरे का पर्याय बन गया है , इश्क खुलासा इससे भी होता है की बिहार के १४१ विधायक अपराधिक मामलों में संलिप्त हैं । यह खुलासा उस सपथ पत्र का है जिसे इन्ही विधायकों ने अपने चुनाव के दौरान किया था । १४१ में ८५ ऐसे विधायक हैं जिनपर संगीन मामले दर्ज हैं । रूपं महज इसमें एक कड़ी है ।
राजकिशोर की हत्या हमारे सामने एक बार फिर स्सरे राजनेता को कठघरे में खड़ा कर उनके पुरे चरित्र को उभर रहा है ।
ऐसा नही की इस हमाम में शिर्फ़ राजकिशोर ही नंगे हैं । जरूरत है एक दफा खंघालने की कलाई खिद ब खुद उतर जाएगी । सवाल यह है की जिस प्रतिनिधि को wah चुनती है , अपने दिन बहुरने की मनसा रखती है और अगर वही उसका चारित्रिक हनन करेगा तो जनता अपनी गुहार खान लगाये गी । जिस तरह से हमारे नेता व्यभिचारी होते जा रहे हैं वह चिंता का विषय है । जिस तरह ये सत्ता को भोगना चाहते हैं , कानून को अपने घर की रखैल समझते हैं ,जरूरत है उनके सामने वो झांझर सी दिवार गिराने की और उन्हें उनके होने का अहसास दिलाने की उनकी अहमियत बताने की ।
आज जिस तरह से राजनीती पथ विमूढ़ हो रही है उसे ध्यान में रखते हिया ऐसा लगता है की राजनीती की नए परिभाषा गढ़नी पड़ेगी । कुछ विधायक जो चर्चित रहे ........
भगवन शर्मा .....२००८ .....आगरा की इक छात्रा के साथ बलात्कार
अमरमणि त्रिपाठी .....२००३......युवा कवायेत्री के साथ बलात्कार , हत्या
आनन्द सेन यादव .........छात्रा शशि के सैट बलात्कार ,हत्या
अनूप संदा इक मुस्लिम के साथ शादी का वादा कर , बलात्कार

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