रविवार, 4 दिसंबर 2011

लोकतंत्र का एक ओजार

लोकतंत्र हर शासन तंत्र सबसे पारदशी मणि जाती है । तो ये जाहिर है की इस पारदर्शिता में और जनता के विस्वास को गढ़ने में कई चीजों का उपयोग होता होगा । सूचना का अधिकार उसी पारदर्शिता को उभरने में या कहें उसी विस्वास के नये भूगोल गढ़ने में एक कड़ी सरीखा है ।
सूचना का अधिकार हमेशा चर्चा के केंद्र में रहा है , चाहे वो शैला मसूद के मामले में रहा हो या फिर २ जी के मामले में या फिर प्रणब मुखर्जी की चिठ्ठी उजागर करने में । आज भी कई लोग इश्क इस्तेमाल नहीं करते परन्तु जितने लोग करते हैं वो सराहना के काबिल हैं । हाँ कई बार ऐसा होता है की सही सूचना नै दी जाती । सत्ता पक्ष के लिए कई बार ये गले की हड्डी साबित हुई है ।
मसलन कारपोरेट मामलों के मंत्री वीरपा मोइली और कानून मंत्री सलमान खुशीद के बयानों से ये साफ हो जाता है की ये कोरस में क्या कहना चाहते हैं । दोनों का मन्ना है की आर टी आई के बेजा इस्तेमाल से संस्थाओं के कामकाज पर असर पड़ता है । इन मंत्रिओं के इस बयान से कुछ हो न हो उनके हौसले जरुर बुलंद होंगे जिन्होंने सूचना के अधिकार के ताहत sउचना देने में ताल मटोल की हो । भले ही इन्होने संसोधन की बात न की हो परन्तु उन लोगों के लिए सोने पे सुहागा है जो लगातार इस हथियार को कुंद करने को प्रयास रत हैं । आज जिस तरह से इश्क इस्तेमाल और इसके प्रति जागरूकता फ़ैल रहा है वो सुखद है हर भारतीय के लिए ।
प्रश्न उठता है की क्या इसकी जरूरत थी ? तो आज के समकालीन दौर में जिस तरह से राजनीती लामबंद हुई है , उसी लामबंदी को तोड़ने में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है ,नही तो जिस तरह के घोटाले हो रहे हैं उनकी कलाई कभी नै खुलती ।
प्रणब मुखर्जी के चिठ्ठी जब सुब्रमण्यम स्वामी ने निकलवाई तो सलमान खुर्शीद ने स्वामी को आड़े हांथों लिया और कहा की कोई मंत्री प्रधानमंत्री को गोपनीय चिठ्ठी लिखता है तो उसे साझा या सार्वजनिक क्यूँ की जानी चाहिए ?
ये बयान बचकाना इसलिए है की यहाँ सवाल की मंत्री और नेता नही है यहाँ सवाल पुरे देश का है और अगर खिन ऐसी खिचड़ी पकती है तो उससे सार्वजनिक होना ही चाहिए । आप जनता के प्रति निधि है उसके प्रति आपको जवाबदेह होना है ।
पुरवा सूचना आयुक्त वजाहत हबिबुलाह ने मोइली और खुर्शीद की टिप्णियों पर प्रतिकार किया है ,और सलाह देते हुए कहा है की इससे घबराने की जरूरत नही । इसे प्रशासन को मजबूत करने के औजार के रूप में देखना चाहिए न की हथियार के रूप में ।
बहरहाल यहाँ ये देखना दिलचस्प होगा की जो सरकार पारदशी और जवाबदेह प्रशासन का डंका पीट पीट नही थकती आज उसी के कई मंत्रिओं के दम फूल रहे हैं ।

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