भारत आयोगों और योजनाओं का देश है । मसलन एक योजना १९७३- ७४ में भी बनी । हर पाच साल के बाद बताया जाता है की देश में गरीबी घाट रही है । पिछले साल बतया गया की भारत में गरीबों की संख्या घाट रही है यह छप्पन प्रतिसत से घट कर छबीस प्रतिशत रह गये है । योजना आयोग की यह दलील सुप्रीम कोर्ट को नागवार गुजरी उसने हस्तछेप करते हुए तलब किया । तब कहीं जाकर उसके सुर बदले और आंकड़ा फिर इकतालीस से छप्पन के बिच झूलने लगा ।
दूसरा आंकड़ों की जादूगरी देखिये हर साल सरकार कहती है हम किसानों का कड़ोरों का बैंक ऋण माफ़ कर रहे हैं । यह महज फ़साना ही है इसका पता तब चलता है जब १९९८ से अब तक का रिकॉर्ड देखें । इस सोलह साल में ढाई लाख किसानो ने आत्महत्या की । यहाँ ये सवाल मौजूं है की ये कड़ोरों रूपये जाते कहां हैं । जब इसके जड़ों को खोदें तब पता चलता है की इस पैसे की बन्दर बाँट सियासी रसूख दर करते हैं या सत्ता के चाटुकार । यह सभी को पता है की किसान को कभी बैंकों से लोने मिलता ही नही । यह मुनादी बस अपने पोलिटिक्स मयलेज़ के लिए होता है ।
आज दंभ भरा जाता है की हम विश्व के दुसरे सबसे तेजी से उभरते हुये अर्थव्यवथा वाले देश हैं। एक भारतीय होने के नाते सब को गरवान्वित होना चाहिए । परन्तु कहीं पढ़ा की जी ड़ी पी रेट गिर कर तक़रीबन साडे छह होगया है । ये जो दावे हैं मुझे समझ नही आते क्यूँ की मुझे पता ही नही चलता की जो कुछ हो रहा है जिस तरह के दावे किये जा रहे हैं वह आंकड़ों की बाजीगरी है या फिर राजनीति का तिरया चरित्र । जो लोगों को अमूमन समझ ही नही आता । इसके बावजूद नारा दिया जाता है'' हो रहा भारत निर्माण ''। आम जनता पूछना चाहती है की भारत निर्माण कहां हो रहा है आज भी गरीबी का आंकड़ा कम नही हुआ , हांथों को काम नहीं है। हाँ भारत निर्माण तो हुआ है स्विस बैंक में ,भारत निर्माण हुआ है ,सांसद और नेताओं के निजी जीवन में ,भारस्ताचार में ।
बहरहाल गुस्सा सरे देश में है ,और ऐसे में कोई अन्ना हजारे जैसा समाजसेवी सड़क पर मसाल लेके भारस्ताचार के खिलाफ अलख जगाने सड़क तक आता है तो किसी को आश्चर्य करने की जरूरत नहीं है । आज अन्ना की आवड बुलंद है क्यूँ की अपनी संसद नहीं बोलती । समय रहते चीजें पारदर्शी नही हुई तो सरकार के रस्ते में दुस्वारियां और बढेंगी । तो जरूरी है की कम को कागज से उतर कर मूर्त रूप दिया जाये । जिस दिन हर प्रतिनिधि जवाबदेह हो जायेगा चीजें प्रत्यक्ष रूप से साथ पर होंगी उसी दिन से सही मायनों में भारत निर्माण की नीव राखी जाएगी ।
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